30 देवी-देवताओं की आरती हिंदी में – गणेश, लक्ष्मी, शिव, विष्णु, हनुमान और अन्य आरतियाँ

सम्पूर्ण आरती संग्रह हिंदी में – 30 देवी-देवताओं की आरती सरल भाषा में

शास्त्रों के अनुसार पूजा में आरती का विशेष महत्व है। आरती हिन्दू धर्म की पूजा-परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम में से अधिकतर लोगों ने पूजा करते समय आरती की होगी। माना जाता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई आरती बहुत कल्याणकारी होती है। क्या आप जानते हैं कि पूजा में आरती का इतना महत्व क्यों है? आज हम आपको बताते हैं कि पूजा में आरती का क्या महत्व है।

धार्मिक मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र या पूजा की विधि नहीं जानता, लेकिन केवल आरती करता है, तो भगवान उसकी पूजा को भी स्वीकार करते हैं। “स्कन्द पुराण” में सबसे पहले आरती के महत्व का उल्लेख मिलता है। आरती हिन्दू धर्म की पूजा-परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हर पूजा, यज्ञ या अनुष्ठान के अंत में आरती की जाती है। इसमें एक थाल में दीपक और कुछ विशेष वस्तुएं रखकर भगवान के सामने घुमाया जाता है। आरती के साथ गाई जाने वाली स्तुति को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। थाल को इस तरह घुमाना चाहिए कि ॐ की आकृति बने। आरती को भगवान के चरणों में चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरे शरीर पर सात बार घुमाना चाहिए। थाल में कपूर या घी के दीपक से ज्योति प्रज्वलित की जा सकती है।

आरती को सुनकर और गाकर श्रद्धालु खुद को धन्य मानते हैं। यह किसी भी देवी-देवता या अपने ईष्टदेव की स्तुति का एक तरीका है। आरती के दौरान भक्तजन गाते हुए धूप, दीप और अन्य सुगंधित वस्तुएं भगवान के सामने घुमाते हैं। मंदिरों में सुबह सबसे पहले पूजा के बाद आरती की जाती है। यही क्रम शाम की पूजा के बाद भी दोहराया जाता है और रात में मंदिर के कपाट आरती के बाद ही बंद होते हैं। मान्यता है कि आरती करने और उसमें शामिल होने वाले दोनों पर प्रभु की कृपा होती है। भक्त को आरती से बहुत पुण्य मिलता है। आरती करते समय देवी-देवता को तीन बार पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मंदिरों में आरती पूरे साज-सज्जा के साथ होती है। कई धार्मिक स्थलों पर आरती का दृश्य बहुत आकर्षक होता है। बनारस के घाट, हरिद्वार, प्रयाग या मां वैष्णों के दरबार में आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। तमिल में आरती को दीप आराधना कहा जाता है।

आरती करते समय भक्त का मन स्वच्छ आरती करते समय भक्त का मन शुद्ध और समर्पित होना चाहिए, तभी उसे आरती का पुण्य मिलता है। माना जाता है कि इस समय भक्त अपने अंतर्मन से ईश्वर को पुकारता है, इसलिए इसे पंचारती भी कहा जाता है। इसमें भक्त अपने शरीर के पांच भाग—मस्तिष्क, हृदय, कंधे, हाथ और घुटने—से साष्टांग होकर आरती करता है। इस आरती को पंच-प्राणों की प्रतीक माना जाता है। कुंडली शॉप के इस खंड में आप विभिन्न देवी-देवताओं की आरती पढ़ सकते हैं।

1. श्री गणेशजी की आरती

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता आपकी पार्वती हैं, पिता हैं महादेवा॥

आप एक दाँत वाले, दयालु और चार भुजाओं वाले हैं।
आपके माथे पर सुंदर तिलक है और मूषक आपकी सवारी है॥

आपको पान, फूल और मेवे चढ़ाए जाते हैं।
लड्डुओं का भोग लगाया जाता है और संत आपकी सेवा करते हैं॥

आप अंधों को दृष्टि और रोगियों को स्वस्थ शरीर प्रदान करते हैं।
संतान की इच्छा रखने वालों को संतान और निर्धनों को धन देते हैं॥

जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, उनकी प्रार्थना स्वीकार करें।
हे गणेशजी, उनकी सेवा सफल बनाएं और कृपा करें॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता आपकी पार्वती हैं, पिता हैं महादेवा॥

2. श्री लक्ष्मीजी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
भगवान विष्णु भी दिन-रात आपकी सेवा करते हैं॥

हे माता, आप उमा, रमा और ब्रह्माणी के रूप में संसार की जननी हैं।
सूर्य, चंद्रमा और नारद मुनि भी आपकी महिमा गाते हैं॥

आप दुर्गा के रूप में सुख, धन और समृद्धि देने वाली हैं।
जो आपकी श्रद्धा से पूजा करता है, उसे ऋद्धि और सिद्धि का आशीर्वाद मिलता है॥

आप पाताल में भी निवास करती हैं और सबका कल्याण करती हैं।
आप कर्मों का फल देने वाली और संसार के संकटों से रक्षा करने वाली हैं॥

जिस घर में आपका निवास होता है, वहाँ अच्छे गुण आते हैं।
आपकी कृपा से कठिन कार्य भी संभव हो जाते हैं और मन का डर दूर होता है॥

आपके बिना यज्ञ, वस्त्र, भोजन और जीवन की समृद्धि अधूरी है।
संसार की सभी सुख-सुविधाएँ आपकी कृपा से प्राप्त होती हैं॥

आप शुभ गुणों से परिपूर्ण हैं और क्षीरसागर से प्रकट हुई हैं।
चौदह रत्नों की प्राप्ति भी आपकी कृपा से होती है॥

जो व्यक्ति श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसके हृदय में आनंद भर जाता है।
आपकी भक्ति से मन शुद्ध होता है और पापों से मुक्ति का मार्ग मिलता है॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता॥

3. श्री विष्णुजी की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
आप अपने भक्तों के संकट पल भर में दूर करते हैं॥

जो आपका ध्यान करता है, उसे मनचाहा फल मिलता है।
उसके मन का दुख मिटता है और घर में सुख-समृद्धि आती है॥

आप ही मेरे माता-पिता और जीवन का सहारा हैं।
आपके अलावा मैं किसी और की शरण में नहीं जाना चाहता॥

आप पूर्ण परमात्मा हैं और सबके मन की बात जानते हैं।
आप ही परमेश्वर हैं और पूरे संसार के स्वामी हैं॥

आप दया के सागर और सबका पालन करने वाले हैं।
मैं अज्ञानी हूँ, प्रभु, मुझ पर अपनी कृपा करें॥

आप दिखाई नहीं देते, फिर भी सबके जीवन का आधार हैं।
हे दयालु प्रभु, मुझे सही मार्ग दिखाएँ ताकि मैं आपको समझ सकूँ॥

आप गरीबों के सहायक और दुखों को दूर करने वाले हैं।
मैं आपके द्वार पर खड़ा हूँ, कृपया मुझे अपनी शरण में लें॥

मेरे मन से बुरे विचार और गलत आदतें दूर करें।
मेरे भीतर श्रद्धा, भक्ति और दूसरों की सेवा करने की भावना बढ़ाएँ॥

मेरा शरीर, मन, धन और सारी संपत्ति आपकी ही देन है।
जो कुछ मेरा है, वह सब आपको समर्पित है॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसे आपकी कृपा प्राप्त होती है।
हे प्रभु, उसके जीवन में सुख, शांति और कल्याण बनाए रखें॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

4. श्री शिवजी की आरती

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव एक ही परम शक्ति के रूप हैं॥

आपके एक, चार और पाँच मुख वाले दिव्य रूपों की महिमा है।
हंस, गरुड़ और नंदी जैसे वाहन इन रूपों से जुड़े हैं॥

आपके दो, चार और अनेक भुजाओं वाले रूप सुंदर हैं।
आपके तीनों गुणों से युक्त स्वरूप को देखकर संसार मोहित होता है॥

आप माला धारण करने वाले, बुराई का नाश करने वाले हैं।
आपके अलग-अलग रूपों में संसार की रक्षा करने वाली शक्ति दिखाई देती है॥

श्वेत, पीले और बाघ की खाल जैसे वस्त्र आपके दिव्य रूपों की पहचान हैं।
ऋषि, देवता और शिवगण आपकी सेवा में रहते हैं॥

आपके हाथों में कमंडल, चक्र और त्रिशूल जैसे पवित्र चिह्न हैं।
आप सुख देने वाले, दुख दूर करने वाले और संसार के पालनकर्ता हैं॥

ब्रह्मा, विष्णु और शिव अलग-अलग कार्य करते हुए भी एक परम सत्य से जुड़े हैं।
ॐ के पवित्र स्वरूप में इन तीनों की एकता दिखाई देती है॥

लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती दिव्य शक्तियों के रूप में आपके साथ हैं।
माता पार्वती आपकी अर्धांगिनी हैं और गंगा आपकी जटाओं में विराजती हैं॥

माता पार्वती पर्वतों से जुड़ी हैं और भगवान शिव कैलाश पर निवास करते हैं।
भस्म, भांग और धतूरा आपके तपस्वी स्वरूप की पहचान हैं॥

आपकी जटाओं से गंगा बहती है और गले में नाग सुशोभित है।
आप मृगछाला धारण करते हैं और संसार को वैराग्य का संदेश देते हैं॥

काशी में आप विश्वनाथ के रूप में विराजमान हैं।
नंदी आपकी सेवा करते हैं और भक्त प्रतिदिन आपके दर्शन करते हैं॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसे सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
हे शिवजी, हमारे जीवन में शांति और कल्याण बनाए रखें॥

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा॥

5. श्री लक्ष्मीनारायणजी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
हे सत्यनारायण भगवान, आप भक्तों के पाप और दुख दूर करते हैं॥

आप रत्नों से सजे सुंदर सिंहासन पर विराजमान हैं।
नारद मुनि आपकी पूजा करते हैं और मंदिर में घंटियाँ बजती हैं॥

कलियुग में आपने भक्तों की सहायता के लिए अनेक रूप धारण किए।
एक ब्राह्मण पर कृपा करके उसका जीवन बदल दिया॥

आपने गरीब और असहाय लोगों पर दया की।
राजा चंद्रचूड़ के संकट भी अपनी कृपा से दूर किए॥

एक व्यापारी ने अपनी इच्छा पूरी होने पर श्रद्धा छोड़ दी।
जब उसे अपने कर्मों का परिणाम मिला, तब उसने फिर आपकी प्रार्थना की॥

आप भक्तों की सच्ची भावना देखकर अलग-अलग रूपों में सहायता करते हैं।
जो श्रद्धा बनाए रखते हैं, उनके कार्य सफल होते हैं॥

ग्वालों और राजा ने वन में आपकी भक्ति की।
आपने उनकी प्रार्थना सुनकर मनचाहा आशीर्वाद दिया॥

आपको केले, मेवे और प्रसाद चढ़ाए जाते हैं।
धूप, दीप और तुलसी से की गई पूजा आपको प्रिय है॥

जो व्यक्ति श्रद्धा से सत्यनारायण भगवान की आरती करता है,
उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा॥

6. श्री रामजी की स्तुति

हे कृपालु श्रीराम, मेरे मन को आपके चरणों में भक्ति करने दें।
आप संसार के भय और दुखों को दूर करने वाले हैं॥

आपकी आँखें, मुख, हाथ और चरण खिले हुए कमल जैसे सुंदर हैं।
आपका रूप अत्यंत शांत, पवित्र और मन को आनंद देने वाला है॥

आपका सांवला रूप वर्षा के नए बादल जैसा सुंदर है।
आपके पीले वस्त्र बिजली की चमक जैसे दिखाई देते हैं॥

आप माता सीता के प्रिय और दीन-दुखियों के सहायक हैं।
आपने दुष्टों और राक्षसों का नाश करके धर्म की रक्षा की॥

आप राजा दशरथ के पुत्र और अयोध्या के गौरव हैं।
आप अपने भक्तों को आनंद देने वाले रघुकुल के श्रेष्ठ पुरुष हैं॥

आपके सिर पर सुंदर मुकुट, कानों में कुंडल और माथे पर तिलक है।
आपके हाथों में धनुष-बाण हैं और आपने खर-दूषण जैसे राक्षसों को हराया॥

तुलसीदासजी कहते हैं कि शिवजी, शेषनाग और ऋषि-मुनि भी आपकी महिमा गाते हैं।
हे प्रभु, मेरे हृदय में निवास करें और काम, क्रोध जैसी बुराइयों को दूर करें॥

माता गौरी ने माता सीता को आशीर्वाद दिया कि उन्हें मनचाहा वर मिलेगा।
श्रीराम जैसे सुंदर, दयालु और गुणवान पति का आशीर्वाद पाकर सीताजी प्रसन्न हुईं॥

माता सीता ने श्रद्धा से गौरीजी की पूजा की।
उनका हृदय आनंद से भर गया और वे प्रसन्न मन से मंदिर से लौटीं॥

सोरठा — सरल अर्थ

माता गौरी का आशीर्वाद पाकर सीताजी अत्यंत प्रसन्न हुईं।
उनकी बाईं ओर शुभ संकेत होने लगे, जिससे उनके मन में आनंद बढ़ गया॥

7. श्री हनुमानजी की आरती

आइए, श्री हनुमानजी की आरती करें।
वे भगवान राम के सेवक और दुष्टों का नाश करने वाले हैं॥

आपके बल से बड़े-बड़े पर्वत भी काँप उठते हैं।
आपकी कृपा से रोग और संकट भक्तों से दूर रहते हैं॥

आप माता अंजनी के पुत्र और अपार शक्ति के स्वामी हैं।
आप अपने भक्तों और उनकी संतानों की रक्षा करते हैं॥

भगवान राम ने आपको माता सीता की खोज में भेजा।
आप लंका गए, माता सीता का समाचार लाए और लंका में आग लगाई॥

विशाल समुद्र पार करने में आपको देर नहीं लगी।
आपने राक्षसों का नाश करके श्रीराम के कार्य पूरे किए॥

जब लक्ष्मणजी मूर्छित हो गए, तब आप संजीवनी बूटी लाए।
आपकी सहायता से उनके प्राण बच गए॥

आप पाताल लोक गए और अहिरावण का नाश किया।
आपने भगवान राम की रक्षा की और भक्तों के संकट दूर किए॥

आप अपनी शक्ति से दुष्टों को हराते हैं और संतों की रक्षा करते हैं।
देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी आपकी आरती करते हैं॥

माता अंजनी कपूर से सजी थाली में आपकी आरती उतारती हैं।
तुलसीदासजी भी आपकी वीरता और भक्ति का गुणगान करते हैं॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती करता है, उसे परम कल्याण का आशीर्वाद मिलता है।
हे हनुमानजी, हमें शक्ति, साहस और सच्ची भक्ति प्रदान करें॥

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

8. श्री बालाजी की आरती

ॐ जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा।
आप संकट दूर करने वाले और महान वीर हैं॥

आप पवनदेव और माता अंजनी के पुत्र हैं।
आपकी महिमा महान है और आप दुख-दरिद्रता दूर करते हैं॥

बचपन में आपने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था।
देवताओं की प्रार्थना पर आपने सूर्य को छोड़ दिया॥

आपने सुग्रीव और श्रीराम की मित्रता करवाई।
अहंकारी बाली का अंत हुआ और धर्म की विजय हुई॥

आपने लंका जाकर माता सीता का समाचार प्राप्त किया।
लंका जलाकर श्रीराम के कठिन कार्य पूरे किए॥

लक्ष्मणजी के मूर्छित होने पर आप संजीवनी बूटी लाए।
आपने उनके प्राण बचाकर सबका दुख दूर किया॥

जब अहिरावण भगवान राम को पाताल ले गया,
तब आपने उसे हराकर श्रीराम को सुरक्षित वापस लाया॥

आप मेहंदीपुर में बालाजी के रूप में पूजे जाते हैं।
मंगलवार और शनिवार को भक्त आपके दर्शन के लिए आते हैं॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसे आपकी कृपा प्राप्त होती है।
हे बालाजी, हमारे जीवन के संकट दूर करें॥

ॐ जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा॥

9. श्री सूर्यदेवजी की आरती

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
आप संसार को प्रकाश देने वाले और जीवन के आधार हैं॥

आपके सारथी अरुण हैं और आपके रथ में सात घोड़े हैं।
आपकी अनगिनत किरणें पूरे संसार में प्रकाश फैलाती हैं॥

सुबह जब आप उदय होते हैं, तब सभी जीव जाग उठते हैं।
आपकी रोशनी से संसार में नई ऊर्जा और उत्साह आता है॥

शाम को जब आप अस्त होते हैं, तब पशु-पक्षी अपने घर लौटते हैं।
गोधूलि के समय हर घर में आपकी महिमा याद की जाती है॥

देवता, ऋषि-मुनि और मनुष्य सभी आपकी पूजा करते हैं।
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करके आपका आशीर्वाद माँगते हैं॥

आप भूत, वर्तमान और भविष्य के साक्षी हैं।
आप सभी प्राणियों को जीवन, बल, बुद्धि और ज्ञान देते हैं॥

धरती, जल और आकाश में रहने वाले जीव आप पर निर्भर हैं।
वेद, पुराण और अनेक धार्मिक परंपराएँ आपकी महिमा बताती हैं॥

सभी दिशाएँ और उनके रक्षक आपकी पूजा करते हैं।
ऋतुएँ भी आपके नियमों के अनुसार बदलती हैं॥

आप सदा रहने वाली शक्ति और संसार के पालनकर्ता हैं।
हे सूर्यदेव, हमें स्वास्थ्य, ऊर्जा और सही मार्ग का आशीर्वाद दें॥

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान॥

10. श्री जगदीशजी की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
आप अपने भक्तों के संकट पल भर में दूर करते हैं॥

जो आपका ध्यान करता है, उसके मन के दुख मिटते हैं।
उसके घर में सुख-समृद्धि आती है और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं॥

आप ही मेरे माता-पिता और सबसे बड़े सहारे हैं।
आपके बिना मेरा कोई दूसरा आश्रय नहीं है॥

आप पूर्ण परमात्मा हैं और सबके हृदय की बात जानते हैं।
आप ही परमेश्वर और पूरे संसार के स्वामी हैं॥

आप दया के सागर और सबका पालन करने वाले हैं।
मैं आपका सेवक हूँ, कृपया मुझ पर दया करें॥

आप दिखाई नहीं देते, फिर भी सबके जीवन में मौजूद हैं।
हे दयालु प्रभु, मुझे आपकी भक्ति का सही मार्ग दिखाएँ॥

आप गरीबों के सहायक और दुखों को दूर करने वाले हैं।
मैं आपके द्वार पर आया हूँ, मुझे अपनी शरण में लें॥

मेरे मन से बुरे विचार और पाप दूर करें।
मेरे भीतर श्रद्धा, भक्ति और संतों की सेवा करने की भावना बढ़ाएँ॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट पल भर में दूर करें॥

11. श्री कुंजबिहारीजी की आरती

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

हे श्रीकृष्ण, आपके गले में सुंदर वैजयंती माला है।
आप मधुर बाँसुरी बजाते हैं और कानों में कुंडल सुशोभित हैं॥

आप नंदबाबा के प्रिय पुत्र और सबको आनंद देने वाले हैं।
आपका सांवला रूप अत्यंत सुंदर है और राधारानी आपके साथ सुशोभित हैं॥

आपके माथे पर कस्तूरी का तिलक है।
आपकी सुंदर छवि देखकर भक्तों का मन प्रसन्न हो जाता है॥

आपके सिर पर सोने जैसा चमकता मोर मुकुट है।
देवता भी आपके दर्शन करने की इच्छा रखते हैं॥

आकाश से फूल बरसते हैं और मृदंग की मधुर ध्वनि सुनाई देती है।
गोपियाँ और ग्वाल-बाल आपके साथ आनंद मनाते हैं॥

आपके चरणों से प्रकट हुई पवित्र गंगा संसार का कल्याण करती है।
उनका स्मरण करने से मन का मोह और पाप दूर होते हैं॥

गंगाजी भगवान शिव की जटाओं में विराजती हैं।
उनकी पवित्रता आपकी दिव्य महिमा का प्रतीक है॥

वृंदावन की धरती सुंदर और पवित्र है।
वहाँ बाँसुरी बजती है और चारों ओर गोपियाँ, ग्वाल-बाल और गायें दिखाई देती हैं॥

आपकी मधुर मुस्कान और दिव्य स्वरूप भक्तों के दुख दूर करते हैं।
हे कुंजबिहारी, हमारी प्रार्थना सुनें और कृपा करें॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

12. श्री गोवर्धनजी की आरती

श्री गोवर्धन महाराज, हे महाराज।
आपके माथे पर सुंदर मुकुट सुशोभित है॥

आपको पान, फूल और दूध अर्पित किया जाता है।
भक्त श्रद्धा से आपकी पूजा करते हैं॥

आपके गले में सुंदर माला है।
आपकी ठोड़ी पर हीरे और रत्नों की शोभा है॥

आपके कानों में कुंडल चमकते हैं।
आपका दिव्य स्वरूप देखकर भक्त आनंदित होते हैं॥

भक्त आपकी सात कोस की परिक्रमा करते हैं।
चक्रलेश्वर पर विश्राम करके आपकी महिमा याद करते हैं॥

हे गिरिराज गोवर्धन, आपने श्रीकृष्ण के रूप में भक्तों की रक्षा की।
हम आपकी शरण में हैं, कृपया जीवन की कठिनाइयों से पार लगाएँ॥

श्री गोवर्धन महाराज, हे महाराज।
आपके माथे पर सुंदर मुकुट सुशोभित है॥

13. श्री युगलकिशोरजी की आरती

आइए, श्री राधा-कृष्ण की आरती करें।
अपना तन, मन और धन उनके चरणों में समर्पित करें॥

राधा और कृष्ण के सुंदर मुख का दर्शन करें।
उनके दिव्य स्वरूप को आँखों और हृदय में बसाएँ॥

उनके मुख की सुंदरता करोड़ों सूर्य और चंद्रमा जैसी है।
उन्हें देखकर भक्तों का मन प्रेम से भर जाता है॥

श्रीकृष्ण पीले और नीले वस्त्रों में सुशोभित हैं।
वे कुंजबिहारी और गोवर्धन पर्वत उठाने वाले गिरिधारी हैं॥

फूलों की सेज और फूलों की माला से उनका श्रृंगार किया गया है।
नंदलाल रत्नों से सजे सिंहासन पर विराजमान हैं॥

सोने की थाली में कपूर की ज्योति जल रही है।
भगवान के दर्शन से भक्तों का हृदय पवित्र हो जाता है॥

सभी स्त्री-पुरुष श्रद्धा से भगवान की आरती करते हैं।
राधा-कृष्ण की दिव्य जोड़ी सदा प्रेम और आनंद का प्रतीक है॥

आरती युगल किशोर की कीजै।
तन, मन, धन न्योछावर कीजै॥

14. श्री बांके बिहारीजी की आरती

हे बांके बिहारी, मैं आपकी आरती गाता हूँ।
हे गिरिधर, आपकी पूजा करके आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ॥

आपके सिर पर सुंदर मोर मुकुट है।
आपकी मधुर बाँसुरी मेरे मन को मोहित कर लेती है॥

आपका दिव्य रूप देखकर मैं आनंद से भर जाता हूँ।
आपकी सुंदर छवि पर बार-बार निछावर होता हूँ॥

आपके चरणों से पवित्र गंगा प्रकट हुई हैं।
उन्होंने संसार के अनगिनत लोगों का कल्याण किया है॥

हे प्रभु, मुझे भी आपके पवित्र चरणों के दर्शन कराएँ।
आपकी शरण में रहकर मेरा जीवन सफल बनाएँ॥

आप असहाय लोगों के सहायक हैं।
जीवन के सुख और दुख में आप हमारे साथ रहते हैं॥

मैं आपके चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ।
आपकी कृपा से मेरा मन शांत होता है॥

आप स्वामी हरिदासजी के प्रिय हैं।
हे मोहन, आप ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा धन हैं॥

राधा-कृष्ण की सुंदर जोड़ी का दर्शन करके मैं धन्य हो जाता हूँ।
हे बांके बिहारी, मेरी भक्ति स्वीकार करें॥

हे बांके बिहारी, मैं आपकी आरती गाता हूँ।
हे गिरिधर, आपकी आरती गाता हूँ॥

15. श्री कुबेरजी की आरती

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे।
आप अपने भक्तों के भंडार भरने वाले धन के देवता हैं॥

आप भगवान शिव के महान भक्त हैं।
आपने देवताओं और अन्य शक्तियों के साथ अनेक युद्ध किए हैं॥

आप सोने के सुंदर सिंहासन पर विराजमान हैं।
आपके सिर पर छत्र है और योगिनियाँ आपका मंगलगान करती हैं॥

आपके हाथों में गदा, त्रिशूल और अन्य शस्त्र हैं।
आप भक्तों के दुख, भय और संकट दूर करते हैं॥

आपकी पूजा में अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन चढ़ाए जाते हैं।
भक्त मोहनभोग, उड़द और चने का प्रसाद अर्पित करते हैं॥

आप बल, बुद्धि और विद्या देने वाले हैं।
आपकी शरण में आने वाले भक्त अपने कार्यों की सफलता की प्रार्थना करते हैं॥

आपके सिर पर रत्नों से सजा मुकुट है।
गले में मोतियों की माला और सामने घी के दीपक जलते हैं॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसे आपकी कृपा प्राप्त होती है।
हे कुबेरजी, हमारे जीवन में सुख और समृद्धि बनाए रखें॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे॥

16. श्री शनिदेवजी की आरती

जय जय श्री शनिदेव, भक्तों का कल्याण करने वाले।
आप सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं॥

आपका रंग श्याम है और आपकी चार भुजाएँ हैं।
आप नीले वस्त्र धारण करते हैं और आपकी सवारी विशेष रूप से वर्णित है॥

आपके सिर पर सुंदर मुकुट है।
आपके गले में मोतियों की माला सुशोभित है॥

आपको मिठाई, पान और सुपारी अर्पित की जाती है।
लोहे, तिल, तेल और उड़द का भी आपकी पूजा में विशेष महत्व है॥

देवता, ऋषि-मुनि, स्त्री और पुरुष सभी आपका स्मरण करते हैं।
भगवान विश्वनाथ भी आपकी महिमा जानते हैं॥

हे शनिदेव, हमें सही कर्म करने की प्रेरणा दें।
हमारे जीवन से अन्याय, भय और संकट दूर करें॥

जय जय श्री शनिदेव, भक्तों का कल्याण करने वाले॥

17. श्री कालभैरवजी की आरती

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
आपकी महिमा का गुणगान माता काली और गौरी भी करती हैं॥

आप पापों से मुक्ति देने वाले और दुखों से पार लगाने वाले हैं।
आपका रूप भयंकर होते हुए भी भक्तों के लिए कल्याणकारी है॥

आप अपने वाहन पर विराजमान हैं और हाथ में त्रिशूल धारण करते हैं।
आपकी शक्ति और महिमा कभी समाप्त नहीं होती॥

आपकी कृपा के बिना पूजा और सेवा अधूरी मानी जाती है।
आपके दर्शन से भक्तों के दुख दूर होने की प्रार्थना की जाती है॥

आपको तेल, दही और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है।
हे भैरव बाबा, कृपया जल्दी हमारी प्रार्थना स्वीकार करें॥

आपके पैरों में घुँघरू बजते हैं और डमरू की ध्वनि सुनाई देती है।
आप बटुक भैरव के बाल रूप में भक्तों को आनंद देते हैं॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसे आपकी कृपा प्राप्त होती है।
हे कालभैरव, हमारे जीवन में साहस और सुरक्षा बनाए रखें॥

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा॥

18. श्री पुरुषोत्तमदेवजी की आरती

जय पुरुषोत्तम देवा, स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा।
आपकी महिमा अनंत है और देवता तथा ऋषि आपकी सेवा करते हैं॥

सभी महीनों में पुरुषोत्तम मास को विशेष पवित्र माना गया है।
भगवान विष्णु की कृपा से इसे श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त हुआ॥

जो श्रद्धा से आपकी पूजा करता है, उसे सुख और शांति मिलती है।
आपकी कृपा से मन और जीवन की बुराइयाँ दूर होती हैं॥

मेधावी ऋषि की कन्या ने आपकी महिमा को समझा।
उसके जीवन की कथा से भक्ति और श्रद्धा का महत्व प्रकट हुआ॥

ब्राह्मण सुदेव ने सेवा और पूजा करके अपने मृत पुत्र को फिर पाया।
भगवान की कृपा से उसे सम्मान और कल्याण प्राप्त हुआ॥

राजा दृढ़धन्वा ने नियम और श्रद्धा से व्रत किया।
आपने उसकी भक्ति स्वीकार करके उस पर कृपा की॥

मणिग्रीव नामक व्यक्ति ने दीपदान किया।
उसकी भक्ति से उसका मन शुद्ध हुआ और उसे भगवान का धाम मिला॥

जो सच्चे मन से पुरुषोत्तम मास का व्रत और पूजा करते हैं,
वे संसार की कठिनाइयों से पार होने का आशीर्वाद पाते हैं॥

जय पुरुषोत्तम देवा, स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा॥

19. श्री सरस्वतीजी की आरती

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
आप सद्गुणों और ज्ञान से परिपूर्ण हैं तथा तीनों लोकों में पूजी जाती हैं॥

आपका मुख चंद्रमा जैसा सुंदर है और आप कमल पर विराजमान हैं।
आपकी सवारी हंस है और आपका दिव्य तेज सबको आकर्षित करता है॥

आपके एक हाथ में वीणा और दूसरे में माला है।
आपके सिर पर सुंदर मुकुट और गले में मोतियों की माला है॥

जो आपकी शरण में आते हैं, आप उनका कल्याण करती हैं।
आपकी कृपा से अज्ञान दूर होता है और बुद्धि का विकास होता है॥

हे ज्ञान की देवी, संसार में ज्ञान का प्रकाश फैलाएँ।
हमारे मन से भ्रम, अज्ञान और अंधकार दूर करें॥

हम आपको धूप, दीप, फल और मेवे अर्पित करते हैं।
हे माता, हमें ज्ञान की दृष्टि दें और सही मार्ग दिखाएँ॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती करता है, उसे ज्ञान और भक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
हे सरस्वती माता, हमारे जीवन में विद्या और सद्बुद्धि बनाए रखें॥

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता॥

20. माँ वैष्णो देवीजी की आरती

जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।
मैं हाथ जोड़कर आपके सामने आरती गाता हूँ॥

आपके सिर पर सुंदर छत्र है और आपका दिव्य रूप मन को आनंद देता है।
आपके चरणों में पवित्र गंगा का भाव है और ज्योति जलती रहती है॥

ब्रह्माजी आपके द्वार पर वेदों का पाठ करते हैं।
भगवान शिव आपका ध्यान करते हैं और नारद मुनि आपकी महिमा गाते हैं॥

आपकी सुंदर गुफा भक्तों को बहुत प्रिय है।
आपके दर्शन की इच्छा से भक्त बार-बार आपके धाम आते हैं॥

आपके भवन पर झंडे लहराते हैं और घंटियाँ बजती हैं।
ऊँचे पर्वतों पर स्थित आपका पवित्र धाम सबको आकर्षित करता है॥

भक्त आपको पान, सुपारी, नारियल, फूल और मेवे चढ़ाते हैं।
वे आपके चरणों में खड़े होकर दर्शन की प्रार्थना करते हैं॥

जो भक्त सच्चे विश्वास के साथ आपके द्वार आता है,
आप उसकी प्रार्थना सुनकर उस पर कृपा करती हैं॥

जो प्रतिदिन आपकी स्तुति करता है, उसके जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
हे वैष्णो माता, हमें अपनी शरण में रखें॥

जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता॥

21. माता पार्वतीजी की आरती

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
आप सनातन देवी और शुभ फल देने वाली हैं॥

आप दुष्टों का नाश करने वाली और भक्तों की रक्षा करने वाली हैं।
आप संसार की जननी हैं और भगवान शिव के साथ पूजी जाती हैं॥

आप सिंह पर सवार होती हैं और सुंदर कुंडल धारण करती हैं।
देवता आपकी महिमा गाते हैं और आनंद से नृत्य करते हैं॥

सतयुग में आप सती के नाम से प्रसिद्ध थीं।
आपने हिमालय के घर जन्म लेकर पार्वती का रूप धारण किया॥

आपने शुंभ और निशुंभ जैसे राक्षसों का नाश किया।
अनेक भुजाओं वाले रूप में आपने शस्त्र धारण करके धर्म की रक्षा की॥

आप सृष्टि की माता और भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं।
नंदी और भृंगी जैसे शिवगण भी आपकी सेवा करते हैं॥

देवता आपकी प्रार्थना करते हैं और भक्त आपका गुणगान करते हैं।
आपकी आरती गाकर सभी सुख और शांति की कामना करते हैं॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती करता है, उसे सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
हे माता पार्वती, हमारे परिवार का कल्याण करें॥

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता॥

22. श्री अम्बेजी की आरती

हे माँ अम्बे, आप जगदम्बा और काली का रूप हैं।
हे दुर्गा माता, हम सब आपकी आरती उतारते हैं॥

आपके भक्तों पर जब भारी संकट आता है,
तब आप सिंह पर सवार होकर उनकी रक्षा करती हैं॥

आप सौ सिंहों के समान शक्तिशाली और दस भुजाओं वाली हैं।
आप दुखी लोगों के दुख दूर करने वाली हैं॥

माता और संतान का रिश्ता बहुत पवित्र होता है।
संतान से गलती हो सकती है, लेकिन माता की ममता कभी कम नहीं होती॥

आप सब पर दया करने वाली और अमृत जैसी कृपा बरसाने वाली हैं।
आप अपने भक्तों के दुख दूर करती हैं॥

हे माता, हम आपसे धन, चाँदी या सोना नहीं माँगते।
हम केवल आपके हृदय में अपने लिए थोड़ा-सा स्थान चाहते हैं॥

आप बिगड़े हुए कार्य सँवारने वाली और भक्तों की लाज रखने वाली हैं।
हे माँ, हमें सच्ची भक्ति और आपका आशीर्वाद दें॥

हे मैया, हम सब आपकी आरती उतारते हैं॥

23. श्री दुर्गाजी की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
ब्रह्मा, विष्णु और शिव भी प्रतिदिन आपका ध्यान करते हैं॥

आपकी माँग में सिंदूर और माथे पर सुंदर तिलक है।
आपकी आँखें उज्ज्वल हैं और मुख चंद्रमा जैसा सुंदर है॥

आपका शरीर सोने जैसा चमकता है और आप लाल वस्त्र पहनती हैं।
आपके गले में लाल फूलों की सुंदर माला है॥

आप सिंह पर सवार होती हैं और हाथों में खड्ग तथा खप्पर धारण करती हैं।
देवता, मनुष्य और ऋषि आपकी पूजा करते हैं॥

आपके कानों में कुंडल और नाक में मोती सुशोभित हैं।
आपका तेज करोड़ों सूर्य और चंद्रमा के समान है॥

आपने शुंभ, निशुंभ और महिषासुर जैसे राक्षसों का नाश किया।
आपने धर्म की रक्षा करके देवताओं को भय से मुक्त किया॥

आपने चंड-मुंड, रक्तबीज, मधु और कैटभ जैसे दुष्टों को हराया।
आपकी शक्ति से संसार में शांति स्थापित हुई॥

आप ब्रह्माणी, रुद्राणी और लक्ष्मी के रूप में पूजी जाती हैं।
वेद और शास्त्र भी आपकी महिमा का वर्णन करते हैं॥

चौंसठ योगिनियाँ आपका मंगलगान करती हैं।
भैरव और अन्य देवता ढोल, मृदंग और डमरू के साथ आपकी स्तुति करते हैं॥

आप ही संसार की माता और सबका पालन करने वाली हैं।
आप भक्तों के दुख दूर करके सुख और समृद्धि देती हैं॥

आपके चार भुजाओं वाले रूप में सुंदर शस्त्र सुशोभित हैं।
जो श्रद्धा से आपकी सेवा करते हैं, उन्हें आपकी कृपा प्राप्त होती है॥

सोने की थाली में कपूर और धूप की ज्योति जलती है।
आपका दिव्य स्वरूप अनगिनत रत्नों की तरह चमकता है॥

जो भक्त श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसे सुख और समृद्धि मिलती है।
हे माँ दुर्गा, हमारे जीवन से भय और संकट दूर करें॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी॥

24. श्री गंगा माँ की आरती

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो आपका ध्यान करता है, उसकी प्रार्थना स्वीकार होती है॥

आपका जल चंद्रमा की रोशनी जैसा निर्मल और पवित्र है।
जो आपकी शरण में आता है, उसे कल्याण का मार्ग मिलता है॥

आपने राजा सगर के पुत्रों का उद्धार किया था।
आपकी कृपा से तीनों लोकों में सुख और पवित्रता का संदेश फैलता है॥

जो व्यक्ति सच्चे मन से आपकी शरण में आता है,
उसे मृत्यु के भय से मुक्ति और परम कल्याण का आशीर्वाद मिलता है॥

जो प्रतिदिन आपकी आरती करता है, उसका मन शुद्ध होता है।
हे गंगा माता, हमें पवित्र विचार और सही मार्ग प्रदान करें॥

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता॥

25. श्री तुलसीजी की आरती

जय जय तुलसी माता।
आप पूरे संसार को सुख और आशीर्वाद देने वाली हैं॥

आप सभी के लिए पवित्र और कल्याणकारी हैं।
आप रोगों और जीवन की कठिनाइयों से रक्षा करने वाली मानी जाती हैं॥

आप भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं।
जो आपकी श्रद्धा से सेवा करता है, उसे कल्याण का आशीर्वाद मिलता है॥

आप भगवान हरि की पूजा में विशेष स्थान रखती हैं।
तीनों लोकों में आपकी महिमा गाई जाती है॥

आप पतित लोगों को सही मार्ग दिखाने वाली हैं।
आपकी पवित्रता और भक्ति का संसार में सम्मान है॥

आपने दिव्य रूप में जन्म लेकर मानव जीवन को पवित्र बनाया।
आपकी कृपा से घरों में सुख और समृद्धि आती है॥

हे तुलसी माता, आप भगवान विष्णु को बहुत प्रिय हैं।
आपका और भगवान हरि का संबंध प्रेम तथा भक्ति का प्रतीक है॥

जय जय तुलसी माता, सब जग की सुखदाता॥

26. श्री अहोई माँ की आरती

जय अहोई माता, जय अहोई माता।
भगवान विष्णु और अन्य देवता भी आपकी महिमा गाते हैं॥

आप ब्रह्माणी, रुद्राणी और लक्ष्मी के रूप में संसार की माता हैं।
सूर्य, चंद्रमा और नारद मुनि भी आपकी स्तुति करते हैं॥

आप सुख और समृद्धि देने वाली पवित्र माता हैं।
जो आपका ध्यान करता है, उसके जीवन में मंगल होता है॥

आप पाताल में भी निवास करने वाली और सबका कल्याण करने वाली हैं।
आप कर्मों का फल देने वाली और संकटों से रक्षा करने वाली हैं॥

जिस घर में आपका आशीर्वाद होता है, वहाँ अच्छे गुण आते हैं।
आपकी कृपा से कठिन कार्य पूरे होते हैं और मन का भय दूर होता है॥

आपके बिना जीवन के सुख अधूरे माने जाते हैं।
संतान, भोजन और समृद्धि के लिए भक्त आपकी प्रार्थना करते हैं॥

आप शुभ गुणों से परिपूर्ण और अत्यंत सुंदर हैं।
आपकी कृपा से जीवन में बहुमूल्य सुख प्राप्त होते हैं॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसके मन में आनंद भर जाता है।
हे अहोई माता, हमारे परिवार और संतानों की रक्षा करें॥

जय अहोई माता, जय अहोई माता॥

27. श्री ललिता माँ की आरती

हे मातेश्वरी, हे त्रिपुरेश्वरी, आपको बार-बार प्रणाम।
हे राजेश्वरी माता, आपकी जय हो॥

आप दया से भरी हुई और पापों को दूर करने वाली हैं।
आप अपने भक्तों पर अमृत जैसी कृपा बरसाती हैं॥

आप अशुभ का नाश करके सुख देने वाली हैं।
आप दुष्ट शक्तियों का अंत करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं॥

आपने भंडासुर जैसे राक्षस का वध किया।
आपकी शक्ति से संसार में धर्म और शांति बनी रहती है॥

आप जन्म-मृत्यु के भय को दूर करने वाली हैं।
आप अपने भक्तों को संकटों से बचाकर शरण देती हैं॥

आप भगवान शिव की प्रिय शक्ति और साधकों के मन को आकर्षित करने वाली हैं।
आप आदिशक्ति हैं और पूरे संसार का आधार हैं॥

हे त्रिपुरसुंदरी, हे राजेश्वरी, आपकी जय हो।
हे ललितेश्वरी, आप दया और अमृत बरसाने वाली हैं॥

हे मातेश्वरी, हे त्रिपुरेश्वरी, आपको बार-बार प्रणाम॥

28. श्री गायत्री माँ की आरती

जय गायत्री माता, जय गायत्री माता।
हमें सच्चाई और अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलाएँ॥

आप आदिशक्ति और संसार का पालन करने वाली हैं।
आप दुख, शोक, भय, गरीबी और संकट दूर करती हैं॥

आप ब्रह्मस्वरूपिणी और सबकी रक्षा करने वाली माता हैं।
आप भक्तों के जीवन में सुख और कल्याण लाती हैं॥

आप भय दूर करने वाली, पवित्र और आनंद का स्रोत हैं।
आपका स्वरूप अटल, शुद्ध और अविनाशी है॥

आप कामधेनु, गंगा, गीता, सावित्री और सीता के दिव्य गुणों से जुड़ी हैं।
आप सूर्य की शाश्वत शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं॥

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में आपकी महिमा है।
आप ॐ की शक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक हैं॥

आप स्वाहा, स्वधा, ब्रह्माणी, राधा और रुद्राणी के रूप में पूजी जाती हैं।
आप विद्या, ज्ञान और कल्याण देने वाली हैं॥

हे माता, हम कमजोर हैं और जीवन की कठिनाइयों से घिरे हैं।
हमसे गलतियाँ होती हैं, फिर भी हम आपके ही बच्चे हैं॥

कृपया हमें अपनी शरण में लें और हम पर दया करें।
हम आपकी संतान हैं और आपके आशीर्वाद की प्रतीक्षा करते हैं॥

हमारे मन से काम, क्रोध, अहंकार, लालच और ईर्ष्या दूर करें।
हमें शुद्ध बुद्धि, पवित्र हृदय और अच्छे विचार दें॥

आप सबकी रक्षा करने और सुख देने में समर्थ हैं।
हे गायत्री माता, हमें हमेशा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलाएँ॥

जय गायत्री माता, जय गायत्री माता॥

29. श्री एकादशी माँ की आरती

ॐ जय एकादशी माता, जय एकादशी माता।
भगवान विष्णु की पूजा और व्रत से भक्त शक्ति तथा मुक्ति की कामना करते हैं॥

हे माता, आपके अनेक पवित्र नाम हैं।
शास्त्रों में आपकी महिमा बताई गई है और आप भक्ति प्रदान करती हैं॥

मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष में उत्पन्ना एकादशी आती है।
शुक्ल पक्ष में मोक्षदा एकादशी होती है, जिसे मुक्ति देने वाली माना जाता है॥

पौष महीने के कृष्ण पक्ष में सफला एकादशी आती है।
शुक्ल पक्ष में पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है॥

माघ महीने के कृष्ण पक्ष में षटतिला एकादशी होती है।
शुक्ल पक्ष में जया एकादशी आती है, जिसे विजय और कल्याण से जोड़ा जाता है॥

फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष में विजया एकादशी आती है।
शुक्ल पक्ष में आमलकी एकादशी मनाई जाती है॥

चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी आती है।
शुक्ल पक्ष में कामदा एकादशी होती है॥

वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में वरुथिनी एकादशी आती है।
शुक्ल पक्ष में मोहिनी एकादशी का व्रत किया जाता है॥

ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष में अपरा एकादशी होती है।
शुक्ल पक्ष में निर्जला एकादशी आती है॥

आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में योगिनी एकादशी आती है।
शुक्ल पक्ष में देवशयनी एकादशी मनाई जाती है॥

श्रावण महीने के कृष्ण पक्ष में कामिका एकादशी होती है।
शुक्ल पक्ष में पवित्रा एकादशी आती है॥

भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष में अजा एकादशी आती है।
शुक्ल पक्ष में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया जाता है॥

आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष में इंदिरा एकादशी आती है।
शुक्ल पक्ष में पापांकुशा एकादशी मनाई जाती है॥

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष में रमा एकादशी आती है।
यह भक्तों के लिए सुख और कल्याण की कामना से जुड़ी है॥

अधिक मास में परमा और पद्मिनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है।
इन व्रतों को दुख और दरिद्रता दूर करने की प्रार्थना से जोड़ा जाता है॥

जो श्रद्धा और भक्ति से एकादशी माता की आरती करता है,
उसे भगवान विष्णु की कृपा और परम कल्याण का आशीर्वाद मिलता है॥

ॐ जय एकादशी माता, जय एकादशी माता॥

30. श्री खाटू श्यामजी की आरती

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
आप खाटू धाम में अपने सुंदर दिव्य रूप में विराजमान हैं॥

आप रत्नों से सजे सिंहासन पर बैठे हैं।
आपके सिर पर चँवर झुलाया जाता है और आप केसरिया वस्त्र पहनते हैं॥

आपके कानों में सुंदर कुंडल हैं और गले में फूलों की माला है।
आपके सिर पर मुकुट सुशोभित है और सामने धूप-दीप जलते हैं॥

भक्त आपको मोदक, खीर और चूरमा का भोग लगाते हैं।
सोने की थाली में प्रसाद सजाकर प्रतिदिन आपकी सेवा करते हैं॥

आपकी आरती के समय शंख, मृदंग और झाँझ बजते हैं।
भक्त आनंद से आपका गुणगान और जयकारा करते हैं॥

जो आपका ध्यान करता है, उसे आपकी कृपा प्राप्त होती है।
भक्त आपके नाम का स्मरण करके दुखों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं॥

जो श्रद्धा से आपकी आरती गाता है, उसे मनचाहा आशीर्वाद मिलता है।
हे श्याम बाबा, अपने भक्तों के कार्य सफल बनाएँ॥

आपने अपने भक्तों की प्रार्थना सुनकर उनके कार्य पूरे किए हैं।
आपकी कृपा से भक्तों के जीवन में विश्वास और आनंद बना रहता है॥

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
आप खाटू धाम में अपने सुंदर दिव्य रूप में विराजमान हैं॥

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